Diwali 2025 Date/Deepavali 2025: हमेशा की तरह दिवाली धूमधाम से मनाई जाती है इस बार दिवाली 2025 की तारीख सोमवार 20 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी, ज्योतिष के अनुसार दिवाली के दिन ग्रहों का अद्भुत सहयोग बन रहा है, जिसके कारण दिवाली (laxmi puja 2025) का त्यौहार और भी शुभ होगा, ग्रहों की अद्भुत सहयोग के कारण लक्ष्मी पूजन करना और भी फलदायी होगा और घर में सुख समृद्धि आएगी।
Contents
Table of Contents
दिवाली अमावस्या तिथि कब है? (Diwali 2025 Date)
ज्योतिष के अनुसार दिवाली अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर 2025 सोमवार को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट्स से प्रारंभ होगी और 21 अक्टूबर मंगलवार के दिन शाम 5 बजकर 54 मिनट्स तक रहेगी, इसलिए दिवाली का यह पर्व 20 अक्टूबर 2025 को सोमवार को ही मनाया जाएगा।
ग्रहों का अद्भुत संयोग
दिवाली (Diwali 2025 Date) के दिन तीन ग्रहों का सहयोग बना रहा है, जिसमें मंगल, सूर्य और बुध ग्रह आपस में मिलेंगे, इसका प्रभाव सभी राशि के लोगों के लिए शुभ माना जाता है, कार्तिक अमावस्या को दिवाली पूजा स्थिर लग्न में करने का विधान है, बहुत लोग स्थिर लग्न में ही मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं।
स्थिर लग्न में जो भी महालक्ष्मी की पूजा करते हैं उनके घर लक्ष्मी मां स्थिरता बनी रहती है, स्थिर लग्न चार होते हैं। जिसमें पहले वृषभ, दूसरा सिंह, तीसरा वृश्चिक और चौथा कुंभ होता है।
लक्ष्मी पूजा 2025 के शुभ मुहूर्त | laxmi puja 2025 shubh muhurat
1. प्रदोष काल मुहूर्त (pradosh kaal muhurat)
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 07 बजकर 34 मिनट से रात 08 बजकर 40 मिनट तक
अवधि: 01 घंटा 06 मिनट
प्रदोष काल: शाम 06 बजकर 09 मिनट से शाम 08 बजकर 40 मिनट तक
वृषभ काल: शाम 07 बजकर 34 मिनट से रात 09 बजकर 31 मिनट तक
2. निशिता काल मुहूर्त (nishita kaal muhurat diwali)
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: रात 12 बजकर 01 मिनट से रात 12 बजकर 51 मिनट तक
अवधि: 00 घंटे 50 मिनट
निशिता काल: रात 12 बजकर 01 मिनट से रात 12 बजकर 51 मिनट तक
सिंह लग्न: रात 02 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 16 मिनट तक
3. लक्ष्मी पूजा शुभ चौघड़िया पूजा मुहूर्त (diwali puja muhurat choghadiya)
अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): दोपहर 03 बजकर 44 मिनट से शाम 06 बजकर 09 मिनट तक
सायंकाल मुहूर्त (चर): शाम 06 बजकर 09 मिनट से शाम 07 बजकर 44 मिनट तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ): रात 10 बजकर 52 मिनट से रात 12 बजकर 26 मिनट तक
उषाकाल मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): रात 02 बजकर 00 मिनट से सुबह 06 बजकर 42 मिनट तक
लक्ष्मी पूजन की तैयारी (laxmi puja vidhi)
- सबसे पहले प्रातः काल घर कि अच्छे से साफ़ सफाई करें।
- स्नान आदि करने के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं।
- शाम के समय पूजा करने से पूरे घर में गंगाजल छिड़क कर शुद्धिकरण करें।
- एक चौकी रखें और चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
- कपड़े के बीच में एक मुट्ठी गेहूं रखें और गेहूं के ऊपर जल से भरा हुआ एक कलश स्थापित करें।
- अब कलश के अंदर एक सिक्का, सुपारी, गेंदे का फूल और अक्षत डालें।
- कलश पर आम या अशोक के पांच पत्ते भी लगाएं। अब कलश को एक छोटी सी थाली से ढंके जिसके ऊपर चावल रख दें।
- माँ लक्ष्मी और गणपति जी की प्रतिमाओं को एक थाली में रखें और दूध, दही, शहद, तुलसी और गंगाजल के मिश्रण से स्नान कराएं।
- इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराकर चौकी पर विराजित कर दें। (कलश के बगल में चौकी में बचे स्थान पर हल्दी से चौक बनाएं और उसपर मां लक्ष्मी कि प्रतिमा रख दें।) इस बात का ध्यान रखें कि मां लक्ष्मी के दाहिने ओर गणेश जी की प्रतिमा रखें।
- लक्ष्मी-गणेश जी की प्रतिमा को टीका लगाएं। फिर लक्ष्मी गणेश जी को हार पहनाएं, फूल और अक्षत अर्पण करें।
- इसके बाद लक्ष्मी गणेश जी के सामने खील-खिलौने, बताशे, मिठाइयां फल, पैसे और सोने के आभूषण रखें।
- इसके बाद एक थाली में हल्दी, कुमकुम और अक्षत रखें और साथ ही दीप भी प्रज्ज्वलित करके रखें। (दो बड़े दीपक लेकर एक में घी और दूसरे में तेल भरकर रखें। एक को मूर्तियों के चरणों में और दूसरे को चौकी की दाईं तरफ रखें, इसके अलावा एक छोटा दीपक गणेशजी के पास भी रखें।)
इसके बाद अपने हाथ में फूल और चावल लेकर मां लक्ष्मी का ध्यान करें।
नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात ॥
या
विष्णुप्रिये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं जगद्धिते
अर्तिहंत्रि नमस्तुभ्यं समृद्धि कुरु में सदा।
नमो नमस्ते महामाया श्री पीठे सुर पूजिते
शंखं चक्रं गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते॥
इसके बाद पूरा परिवार मिलकर गणेश जी और लक्ष्मी माता की कथा सुनें और फिर मां लक्ष्मी की आरती उतारें।
दिवाली 20 अक्टूबर है या 21?
दिवाली का यह पर्व 20 अक्टूबर 2025 को सोमवार को हुई मनाया जाएगा।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के आधार पर प्रस्तुत की गई है। हिन्दीसनातन इस जानकारी की सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करता है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे केवल जानकारी के रूप में लें और किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। हमारा उद्देश्य किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या गलत धारणाओं को बढ़ावा देना नहीं है।
इसे भी पढ़े :




















