🙏 जय श्री राम | हर हर महादेव | जय माता दी
श्रीमद् भगवद् गीता — अध्याय २, श्लोक ४७
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता मत करो।
कर्म के फल का कारण मत बनो और अकर्म में भी आसक्त मत हो।
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