Dusra Sawan Somwar 2026: 10 अगस्त को कब और कैसे करें शिव पूजन? जाने पूजा का शुभ मुहूर्त

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Published On: अगस्त 5, 2026
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Dusra Sawan Somwar 2026 Shubh Muhurat

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Dusra Sawan Somwar 2026: श्रावण मास शिव भक्तों के लिए सबसे पावन और प्रिय महीना माना जाता है, और इसी महीने के हर सोमवार को उपवास व आराधना का विशेष स्थान प्राप्त है। सावन का दूसरा सोमवार इस बार 10 अगस्त (Sawan ka Dusra Somwar 2026) को पड़ रहा है, लेकिन खास बात यह है कि इसी दिन सोम प्रदोष व्रत का भी दुर्लभ महासंयोग बन रहा है, यानी सोमवार और त्रयोदशी तिथि का मेल, जिसे भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है।

इस पावन दिन पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्त भजन, आरती और मंत्रोच्चार के साथ भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन रहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जीवन में आ रही किसी भी बाधा चाहे वह स्वास्थ्य से जुड़ी हो, विवाह में देरी की समस्या हो या कोई अन्य संकट सावन सोमवार व्रत और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से उसका निवारण संभव है। अविवाहित युवतियां मनचाहा वर पाने के लिए, विवाहित जोड़े सुखी दांपत्य जीवन के लिए, और नौजवान करियर में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखते हैं।

अलग-अलग राज्यों में सावन की तारीख अलग क्यों होती है?

बहुत से लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि सावन सोमवार की तारीखें कहीं 3-10-17-24 अगस्त बताई जाती हैं, तो कहीं इससे बिल्कुल अलग, इसकी वजह है हमारे देश में इस्तेमाल होने वाले दो अलग-अलग हिंदू कैलेंडर। उत्तर भारत के राज्यों – जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड – में “पूर्णिमांत” कैलेंडर चलता है, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, गोवा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में “अमांत” कैलेंडर का पालन होता है।

आसान भाषा में समझें तो पूर्णिमांत कैलेंडर वाले राज्यों में सावन का महीना, अमांत कैलेंडर वाले राज्यों से करीब 15 दिन पहले शुरू हो जाता है। यही कारण है कि सावन सोमवार की आधी तारीखें दोनों तरह के कैलेंडर में एक-दूसरे से मेल नहीं खातीं। इसके अलावा, नेपाल और हिमाचल-उत्तराखंड के कुछ इलाकों में सावन सोमवार सूर्य आधारित कैलेंडर के हिसाब से मनाया जाता है, तो वहां की तारीखें इन दोनों से भी अलग हो सकती हैं। इस लेख में दी गई सभी तारीखें उत्तर भारत (नॉर्थ इंडिया) में प्रचलित पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार हैं।

तीनों प्रदेश की तारीखें एक साथ देख लें, ताकि भ्रम न रहे

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड (पूर्णिमांत कैलेंडर)

  • सावन शुरू: 30 जुलाई 2026, बृहस्पतिवार
  • पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
  • दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
  • तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
  • चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
  • सावन समाप्त: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु (अमांत कैलेंडर)

  • सावन शुरू: 13 अगस्त 2026, बृहस्पतिवार
  • पहला सोमवार: 17 अगस्त 2026
  • दूसरा सोमवार: 24 अगस्त 2026
  • तीसरा सोमवार: 31 अगस्त 2026
  • चौथा सोमवार: 7 सितंबर 2026
  • सावन समाप्त: 11 सितंबर 2026, शुक्रवार

नेपाल, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ भाग (सौर कैलेंडर)

  • सावन शुरू: 16 जुलाई 2026, बृहस्पतिवार
  • पहला सोमवार: 20 जुलाई 2026
  • दूसरा सोमवार: 27 जुलाई 2026
  • तीसरा सोमवार: 03 अगस्त 2026
  • चौथा सोमवार: 10 अगस्त 2026
  • सावन समाप्त: 16 अगस्त 2026, रविवार

ध्यान दें कि यदि आप महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक या दक्षिण भारत के किसी अन्य राज्य से हैं, तो आपके लिए सावन सोमवार की सही तारीखें ऊपर बताई गई अमांत कैलेंडर वाली लिस्ट होंगी, न कि इस लेख (Article) के बाकी हिस्से में दी गई उत्तर भारतीय तारीखें।

Dusra Sawan Somwar 2026 Shubh Muhurat पूजा का समय (नॉर्थ इंडिया)

पंचांग गणना के अनुसार, सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को श्रावण मास कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह करीब 8 बजे तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ हो जाएगी, जो अगले दिन यानी 11 अगस्त 2026 को सुबह 04 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसी दिन सोम प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है, जो सामान्यतः महीने में सिर्फ दो बार आता है, लेकिन जब यह सोमवार को पड़े, तो इसे विशेष फलदायी माना जाता है।

सोम प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त – सोमवार 10 अगस्त 2026 की शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 09 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल का यह समय लगभग 2 घंटे 09 मिनट का होगा, इस अवधि में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना सम्पन्न की जा सकती है।

Dusra Sawan Somwar 2026 Shubh Muhurat
सावन का पहला प्रदोष कब है? –  फोटो : unsplash

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का समय

ब्रह्म मुहूर्तसुबह 04 बजकर 30 मिनट से 05 बजकर 13 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12 बजकर 06 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक।
प्रदोष कालशाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 09 बजकर 18 मिनट तक।
अमृत चौघड़ियासुबह 05 बजकर 56 मिनट से 07 बजकर 35 मिनट तक
शुभ चौघड़िया सुबह 09 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक।
अमृत चौघड़ियाशाम 05 बजकर 29 मिनट से 07 बजकर 08 मिनट तक।

Dusra Sawan Somwar 2026 की पूजा विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र कर लें, फिर वहां भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश की वंदना करके पूजा प्रारंभ करें। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर अर्पित करें, साथ ही बेलपत्र, धतूरा, भस्म और सफेद पुष्प भी चढ़ाएं।

“ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए दीपक प्रज्ज्वलित करें, चंदन का तिलक लगाएं और फल-मिष्ठान का भोग अर्पित करें। माता पार्वती को भी दूध, चावल, मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं।

पूजा के अंत में शिव-पार्वती की आरती करें, फिर परिवार में प्रसाद वितरित करें। सावन सोमवार व्रत कथा सुनना इस दिन आवश्यक माना जाता है। दिनभर फल, दूध और पंचामृत जैसा फलाहार ग्रहण करें, तथा अन्न, सामान्य नमक और तले-भुने भोजन से दूर रहें। चूंकि इस दिन प्रदोष काल में भी विशेष पूजा का विधान है, इसलिए शाम को सूर्यास्त से पहले स्नान करके दोबारा शिव पूजन करने की परंपरा भी कई घरों में निभाई जाती है।

Dusra Sawan Somwar 2026
Dusra Sawan Somwar 2026 – photo – unsplash

सावन सोमवार व्रत के नियम और लाभ

इस व्रत में मानसिक और शारीरिक शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। झूठ बोलना, दूसरों की निंदा करना, छल-कपट रखना तथा बाल-नाखून काटना इस दौरान अशुभ माना गया है। दिनभर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का स्मरण करते रहें और अवसर मिलने पर शिव चालीसा या अन्य शिव मंत्रों का पाठ करें।

मान्यता है कि सोमवार और प्रदोष व्रत का यह संयुक्त संयोग भगवान शिव की कृपा को दोगुना कर देता है, जीवन की सभी बाधाओं का नाश करता है और घर-परिवार में सुख, समृद्धि तथा शांति बनाए रखता है।

निष्कर्ष

Dusra Sawan Somwar 2026 शिवभक्तों के लिए एक अत्यंत पुण्यदायी अवसर है, और इस बार सोम प्रदोष व्रत का संयोग इसे और भी विशेष बना देता है। सच्ची श्रद्धा और सही विधि से पूजा करने पर भोलेनाथ अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और हर संकट से मुक्ति प्रदान करते हैं।

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(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के आधार पर प्रस्तुत की गई है। हिन्दीसनातन इस जानकारी की सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करता है। इसे केवल जानकारी के रूप में लें और किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।)

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नमस्ते मेरा नाम जगदीश कुमार है , मे hindisanatan.com मे चौघड़िया, मंत्र-स्तोत्र, भजन, पाठ और पूजा विधि जैसे आध्यात्मिक विषयों पर लेख लिखता हूँ। मेरा उद्देश्य सनातन धर्म की शुद्ध और प्रमाणिक जानकारी लोगों तक पहुँचाना है।

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Jagdish Kumar

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