होली का त्यौहार हो और राधा-कृष्ण के गीतों का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। ‘मत मारो श्याम पिचकारी‘ (Mat Maro Shyam Pichkari Lyrics) एक ऐसा ही पारंपरिक और मधुर भजन है जो हर साल होली के उत्सव में चार चाँद लगा देता है। इस गीत में राधा रानी भगवान श्री कृष्ण से होली न खेलने की मनुहार कर रही हैं। आइए पढ़ते हैं इस खूबसूरत भजन के बोल।
Contents
Mat Maro Shyam Pichkari lyrics जानकारी
| गीत (Song) | मत मारो श्याम पिचकारी (Mat Maro Shyam Pichkari) |
| एल्बम/फिल्म | दुर्गेश नंदिनी |
| गायक | लता मंगेशकर (lata mangeshkar) |
| गीतकार (lyrics) | राजेंद्र कृष्ण |
| रिलीज डेट | 01 जनवरी, 1956 |
| समय | 03:17 मिनट |
| भाषा | हिंदी |
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Mat Maro Shyam Pichkari Lyrics | मत मारो श्याम पिचकारी लिरिक्स
मत मारो श्याम पिचकारी,
मत मारो श्याम पिचकारी।
मोरी भीगी चुनरिया सारी रे,
मत मारो श्याम पिचकारी।
मोरी भीगी चुनरिया सारी रे,
मत मारो श्याम पिचकारी।
नाजुक तन मोरा, रंग न डारो श्याम,
अंग-अंग मोरा फड़के।
रंग पड़े जो मोरे गोरे बदन पर,
रूप की ज्वाला भड़के।
कित जाऊँ मैं लाज की मारी रे,
मत मारो श्याम पिचकारी।
मोरी भीगी चुनरिया सारी रे,
मत मारो श्याम पिचकारी।
काह करूँ कान्हा, रूप है बैरी मेरा,
रंग पड़े छिल जाये।
देखे यह जग मोहे तिरछी नजरिया से,
मोरा जिया घबराये।
कित जाऊँ मैं लाज की मारी रे,
मत मारो श्याम पिचकारी।
मोरी भीगी चुनरिया सारी रे,
मत मारो श्याम पिचकारी।
Mat Maro Shyam Pichkari Lyrics English
Mat maro shyam pichakari,
Mat maro shyam pichakari.
Mori bhigi chunariya saari re,
Mat maro shyam pichakari.
Mori bhigi chunariya saari re,
Mat maro shyam pichakari.
Naajuk tan mora, rang na daaro shama,
Ang-ang mora phadake.
Rang pade jo more gore badan par,
Roop ki jwala bhadake.
Kit jaaun main laaj ki maari re,
Mat maro shyam pichakari.
Mori bhigi chunariya saari re,
Mat maro shyam pichakari.
Kaah karun kaanha, roop hai bairi mera,
Rang pade chhil jaaye.
Dekhe yeh jag mohe tirachhi najariya se,
Mora jiya ghabaraye.
Kit jaaun main laaj ki maari re,
Mat maro shyam pichakari.
Mori bhigi chunariya saari re,
Mat maro shyam pichakari.
Mat maro shyam pichakari.
लिरिक्स का अर्थ
इस भजन में राधा रानी कृष्ण से कहती हैं कि हे श्याम! मुझ पर रंग मत डालो, क्योंकि मेरी सारी चुनरी भीग गई है। मेरा शरीर अत्यंत कोमल है और अगर इस पर रंग पड़ा तो लोग मुझे अलग नजरों से देखेंगे जिससे मुझे लज्जा आती है। यह गीत ब्रज की होली के प्रेम और सात्विक छेड़छाड़ को दर्शाता है।
निष्कर्ष
होलिका दहन और रंगवाली होली के अवसर पर इस भजन को सुनने से मन भक्ति और आनंद से भर जाता है। आशा है आपको Mat Maro Shyam Pichkari Lyrics पसंद आए होंगे। इसे ही भजन लीरिक्स देखने के लिए hindisanatan.com को जरूर फॉलो करे।
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‘मत मारो श्याम पिचकारी’ भजन किस उत्सव पर गाया जाता है?
यह भजन मुख्य रूप से होली के त्यौहार और ब्रज की लठमार होली के दौरान गाया जाता है।
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