हिंदू धर्म में किसी भी पूजा, व्रत या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत संकल्प मंत्र से की जाती है। संकल्प मंत्र (aaj ka sankalp mantra) पूजा की आत्मा होती है, जो हमारे मन के उद्देश्य को ईश्वर के समक्ष प्रस्तुत करता है। यह मंत्र हमें यह विश्वास दिलाता है कि हम किस उद्देश्य से पूजा कर रहे हैं और किस फल की प्राप्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। संकल्प मंत्र के बिना किसी भी पूजा या धार्मिक अनुष्ठान को अधूरा माना जाता है।
इस लेख में हम लघु संकल्प मंत्र, सरल संकल्प मंत्र और विस्तृत संकल्प मंत्र का पूरा पाठ, विधि और महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे।
Aaj ka sankalp mantra
संकल्प का अर्थ होता है दृढ़ निश्चय। जब हम कोई पूजा, यज्ञ, हवन, व्रत या धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, तो उसमें हमारी श्रद्धा और विश्वास होना आवश्यक है। संकल्प मंत्र के माध्यम से हम देवता के समक्ष अपनी भावना और उद्देश्य प्रकट करते हैं।
संकल्प मंत्र में समय, स्थान, गोत्र, नाम और अनुष्ठान का नाम लिया जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूजा किस उद्देश्य से की जा रही है और किसके द्वारा की जा रही है।
लघु संकल्प मंत्र
यह sankalp mantra सामान्य रूप से छोटी पूजा या रोजाना की पूजा में प्रयोग किया जाता है। यह बहुत सरल और छोटा होता है, लेकिन इसका प्रभाव उतना ही शक्तिशाली होता है।
मंत्र: ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं (कार्य का नाम) करिष्ये।
उदाहरण: अगर आप भगवान गणेश की पूजा कर रहे हैं तो मंत्र होगा –
ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा श्रीगणेश प्रीत्यर्थं गणेशपूजनं करिष्ये।
सरल संकल्प मंत्र
यह sankalp mantra व्रत, त्योहार या विशेष पूजा में प्रयोग किया जाता है। इसमें साधक का नाम, गोत्र और उद्देश्य का उल्लेख होता है।
मंत्र: ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं अहं (अपना नाम) (पिता का नाम) पुत्र (गोत्र का नाम) गोत्र: (कार्य का नाम) करिष्ये।
उदाहरण: अगर आप करवा चौथ का व्रत कर रहे हैं तो – ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा श्रीशिवपार्वती प्रीत्यर्थं अहं (अपना नाम) (पिता का नाम) पुत्र (गोत्र का नाम) करवा चौथ व्रतम् करिष्ये।
विस्तृत sankalp mantra
यह संकल्प मंत्र बड़े धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञ, हवन, गृह प्रवेश, विवाह आदि में प्रयोग किया जाता है। यह मंत्र सबसे बड़ा और सबसे विस्तृत होता है। इसमें समय, स्थान, गोत्र, नाम, उद्देश्य और पूजा का पूरा विवरण होता है।
मंत्र: ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:। अद्य ब्रह्मणः द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे भारतवर्षे भरतखण्डे (स्थान का नाम) नगरे (गोत्र का नाम) गोत्रे अहं (अपना नाम) पुत्र (पिता का नाम) (कार्य का नाम) करिष्ये।
उदाहरण: अगर आप गृह प्रवेश पूजा कर रहे हैं तो – ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:। अद्य ब्रह्मणः द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे भारतवर्षे भरतखण्डे (शहर का नाम) नगरे (गोत्र का नाम) गोत्रे अहं (नाम) पुत्र (पिता का नाम) गृह प्रवेश पूजनं करिष्ये।
संकल्प मंत्र में शब्दों का अर्थ
संकल्प मंत्र में कई संस्कृत शब्द आते हैं जिनका अर्थ समझना ज़रूरी है, ताकि संकल्प लेते समय सही स्थान पर सही जानकारी भरी जा सके:
- गोत्र – वह वंश परंपरा जिससे व्यक्ति संबंधित है (जैसे भारद्वाज गोत्र, कश्यप गोत्र आदि)
- अयन – सूर्य की गति के अनुसार दो भाग: उत्तरायण और दक्षिणायन
- ऋतु – वर्ष की छह ऋतुएं: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर
- मास – हिंदू पंचांग के 12 महीने: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ आदि
- पक्ष – महीने के दो भाग: शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा)
- तिथि – चंद्र कैलेंडर की तारीख (जैसे प्रतिपदा, द्वितीया, पूर्णिमा)
- वासर/वार – सप्ताह का दिन (रविवार, सोमवार आदि)
- नक्षत्र – चंद्रमा की स्थिति के अनुसार 27 नक्षत्रों में से एक
- संवत्सर – हिंदू पंचांग का वर्ष-नाम (जैसे विक्रम संवत्)
इन शब्दों को अपने स्थान, तिथि और गोत्र के अनुसार संकल्प मंत्र में भरा जाता है।
पूजा अनुसार अलग-अलग संकल्प मंत्र
सत्यनारायण पूजा संकल्प मंत्र
ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा श्रीसत्यनारायण प्रीत्यर्थं अहं (अपना नाम) (गोत्र का नाम) गोत्र: श्रीसत्यनारायणपूजनं करिष्ये।
नवरात्रि/दुर्गा पूजा संकल्प मंत्र
ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा श्रीदुर्गा प्रीत्यर्थं अहं (अपना नाम) (गोत्र का नाम) गोत्र: नवरात्रि दुर्गापूजनं करिष्ये।
विवाह संकल्प मंत्र
ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं अहं (वर/वधू का नाम) (गोत्र का नाम) गोत्र: विवाह संस्कारं करिष्ये।
श्राद्ध/पितृ संकल्प मंत्र
ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा पितृप्रीत्यर्थं अहं (अपना नाम) (गोत्र का नाम) गोत्र: (पितर का नाम) श्राद्धं करिष्ये।
लक्ष्मी पूजा (दीपावली) संकल्प मंत्र
ॐ ममोपात्त समस्त दुर्मितक्षयद्वारा श्रीमहालक्ष्मी प्रीत्यर्थं अहं (अपना नाम) (गोत्र का नाम) गोत्र: महालक्ष्मीपूजनं करिष्ये।
संकल्प मंत्र लेने की विधि (sankalp mantra)
- सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा सामग्री जैसे – जल, अक्षत (चावल), पुष्प और मुद्रा (रुपये या सिक्के) अपने पास रखें।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लें।
- संकल्प मंत्र का उच्चारण करें।
- मंत्र पूरा होने के बाद जल को भूमि पर छोड़ दें।
संकल्प मंत्र के नियम
संकल्प मंत्र हमेशा स्वच्छ और शांत मन से लिया जाना चाहिए। संकल्प मंत्र का उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट होना चाहिए। हमेसा संकल्प के दौरान ईश्वर का ध्यान अवश्य करें। संकल्प में कही गई बात का पालन करना आवश्यक होता है।
संकल्प मंत्र के लाभ
- मन की एकाग्रता बढ़ती है।
- पूजा विधि विधान से संपन्न होती है।
- देवता की कृपा प्राप्त होती है।
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
संकल्प मंत्र क्यों लिया जाता है?
संकल्प मंत्र इसलिए लिया जाता है ताकि पूजा से पहले हमारा उद्देश्य, श्रद्धा और मन स्पष्ट रूप से ईश्वर के समक्ष प्रकट हो सके। बिना संकल्प के पूजा अधूरी मानी जाती है।
संकल्प मंत्र में गोत्र क्यों बोला जाता है?
गोत्र बोलने से यह पहचाना जाता है कि पूजा किस वंश-परंपरा के व्यक्ति द्वारा की जा रही है। यह वैदिक परंपरा में पहचान और सम्मान दोनों का प्रतीक है।
क्या बिना पंडित के संकल्प ले सकते हैं?
हां, छोटी और घरेलू पूजा के लिए स्वयं संकल्प लिया जा सकता है, लेकिन बड़े अनुष्ठानों (यज्ञ, विवाह, श्राद्ध आदि) में पंडित के मार्गदर्शन में संकल्प लेना उचित माना जाता है।
रोज़ाना पूजा में कौन सा संकल्प मंत्र बोलें?
रोज़ाना की पूजा के लिए लघु संकल्प मंत्र पर्याप्त होता है, क्योंकि यह छोटा, सरल और प्रभावशाली है।
संकल्प मंत्र संस्कृत में क्यों होता है?
संस्कृत को देववाणी माना जाता है, और वैदिक परंपरा में हर मंत्र का उच्चारण संस्कृत में करने से उसकी शुद्धता और शक्ति बनी रहती है।
संकल्प के समय जल क्यों हाथ में लिया जाता है?
जल को साक्षी माना जाता है। संकल्प पूरा होते ही जल भूमि पर छोड़ा जाता है, जो यह दर्शाता है कि यह वचन पृथ्वी और जल तत्व की साक्षी में लिया गया है।
निष्कर्ष
संकल्प मंत्र (aaj ka sankalp) हमारी आस्था और श्रद्धा को प्रकट करने का माध्यम है। यह किसी भी पूजा या अनुष्ठान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। बिना संकल्प के पूजा अधूरी मानी जाती है। चाहे वह छोटी पूजा हो, व्रत हो या फिर बड़ा धार्मिक अनुष्ठान, संकल्प मंत्र के बिना उसका कोई महत्व नहीं होता।
sankalp mantra हमें यह याद दिलाता है कि हमारी हर पूजा का एक उद्देश्य है और हम उस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए पूरी श्रद्धा से ईश्वर की आराधना कर रहे हैं।
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी पारंपरिक मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। हिन्दीसनातन इसकी पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करता। किसी भी बड़े अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित/पुरोहित से परामर्श अवश्य लें।)
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