Amalaki Ekadashi 2026: कब है आमलकी एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त और पारण का सही समय

Published On: फ़रवरी 20, 2026
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Amalaki Ekadashi 2026

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फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जिसे ‘आंवला एकादशी’ भी कहते हैं. Amalaki Ekadashi 2026 में यह महाशिवरात्रि और होली के पावन पर्वों के मध्य में पड़ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विधान है, क्योंकि इसी दिन विष्णु जी ने इस वृक्ष को उत्पन्न किया था।

Amalaki Ekadashi 2026 तिथि और पारण समय

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी की रात 12 बजकर 33 मिनट्स से शुरू होगी ओर उसी दिन रात 10 बजकर 32 मिनट्स पर समाप्त होगी। इसी के साथ आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi 2026) का व्रत 27 फरवरी को रखा जाएगा। व्रत के पारण का समय अगले दिन शनिवार 28 फरवरी सुबह 6 बजकर 47 मिनट्स से 9 बजकर 6 मिनट्स के मध्य किया जाएगा।

आमलकी एकादशी व्रत का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, Amalaki Ekadashi 2026 का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है. साल 2026 में उदया तिथि के अनुसार यह व्रत 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा. इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करना और आंवले का दान करना अत्यंत फलदायी होता है. कभी-कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए भी हो जाता है, ऐसी स्थिति में नियमों का पालन बहुत सावधानी से करना चाहिए।

आमलकी एकादशी पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा को पीले वस्त्र और पुष्प अर्पित करें।
  • आंवले के वृक्ष की पूजा करें, उसे जल चढ़ाएं और धूप-दीप दिखाएं।
  • आंवले का फल भगवान को भोग के रूप में चढ़ाएं और स्वयं भी प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।

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एकादशी व्रत पारण के अनिवार्य नियम

एकादशी व्रत को विधिपूर्वक समाप्त करने की प्रक्रिया को पारण कहा जाता है, जिसका पालन करना हर श्रद्धालु के लिए अनिवार्य है. एकादशी व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद ही पारण किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी तिथि के भीतर ही पारण करना अति आवश्यक होता है; यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो गई हो, तो सूर्योदय के तुरंत बाद पारण करना चाहिए. ध्यान रहे कि द्वादशी तिथि समाप्त होने के बाद पारण करना धार्मिक दृष्टि से पाप करने के समान माना गया है।

हरि वासर और पारण का सबसे उपयुक्त समय

पारण करते समय हरि वासर की अवधि का विशेष ध्यान रखना चाहिए. हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई समय अवधि होती है, और इस दौरान व्रत खोलना वर्जित माना गया है. श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे हरि वासर के समाप्त होने की प्रतीक्षा करें और उसके बाद ही अपना व्रत खोलें. व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल का होता है, और मध्याह्न (दोपहर) के दौरान व्रत खोलने से बचना चाहिए. यदि कोई व्यक्ति विशेष परिस्थितियों के कारण सुबह पारण करने में सक्षम नहीं है, तो उसे मध्याह्न के बाद ही पारण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

किसे कब रखना चाहिए व्रत

जब एकादशी दो दिनों की होती है, तो पहले दिन की एकादशी को स्मार्त एकादशी और दूसरे दिन को दूजी एकादशी कहा जाता है. सामान्य गृहस्थों और स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन ही एकादशी का व्रत करना चाहिए. वहीं, सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष की प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूसरे दिन यानी दूजी एकादशी के दिन व्रत रखने का विधान है. जब-जब एकादशी दो दिन की होती है, तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी अक्सर एक ही दिन पड़ती हैं. भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे पुण्य फल की प्राप्ति के लिए दोनों दिन का व्रत रखें। लेकिन इस बार एक ही एकदशी है।

(डिस्क्लेमर:  इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं पर आधारित है। हिन्दीसनातन इस जानकारी की सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करता है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे केवल जानकारी के रूप में लें और किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।)

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नमस्ते मेरा नाम जगदीश कुमार है , मे hindisanatan.com मे चौघड़िया, मंत्र-स्तोत्र, भजन, पाठ और पूजा विधि जैसे आध्यात्मिक विषयों पर लेख लिखता हूँ। मेरा उद्देश्य सनातन धर्म की शुद्ध और प्रमाणिक जानकारी लोगों तक पहुँचाना है।

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Jagdish Kumar

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