Tarak mantra lyrics: श्री स्वामी समर्थ महाराज, जिन्हें अक्कलकोट के स्वामी समर्थ भी कहा जाता है, महाराष्ट्र के महान संत और भगवान दत्तात्रेय के अवतार माने जाते हैं। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन अक्कलकोट (जिला सोलापुर) में बिताया और असंख्य भक्तों को भय, संकट और निराशा से मुक्ति का मार्ग दिखाया। उनका आश्वासन “भिऊ नकोस, मी तुझ्या पाठीशी आहे” (डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ) आज भी करोड़ों भक्तों को हिम्मत देता है। आइए जानते है tarak mantra lyrics के बोल, अर्थ, फायदे और पाठ करने की विधि
श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र क्या है? (tarak mantra)
श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र (swami samarth tarak mantra) एक प्रसिद्ध भक्ति मंत्र है जो अक्कलकोट के श्री स्वामी समर्थ महाराज को समर्पित है। “तारक” का मतलब है तारने वाला, यानी मुसीबत से पार लगाने वाला। भक्त मानते हैं कि इस मंत्र का पाठ करने से डर कम होता है और मन को हिम्मत मिलती है।
इस मंत्र की हर चौकड़ी “अशक्य ही शक्य करतील स्वामी” पर खत्म होती है। इसका मतलब है कि जो काम असंभव लगता है, स्वामी उसे भी संभव कर देते हैं।
श्री स्वामी समर्थ महाराज कौन थे?
स्वामी समर्थ महाराज महाराष्ट्र के बहुत बड़े संत थे। उन्हें भगवान दत्तात्रेय का अवतार माना जाता है। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन अक्कलकोट (जिला सोलापुर) में बिताया। उनका प्रसिद्ध वचन है: “भिऊ नकोस, मी तुझ्या पाठीशी आहे”, यानी “डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ।”
Swami samarth tarak mantra lyrics in Marathi
गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा.
गुरु साक्षात परब्रम्हा, तस्मै श्री गुरवे नमः
निशंक होई रे मना, निर्भय होई रे मना ।
प्रचंड स्वामीबळ पाठीशी, नित्य आहे रे मना ।
अतर्क्स अवधूत हे स्मर्तुगामी,
अशक्य ही शक्य करतील स्वामी ।।१।।
जिथे स्वामीचरण तिथे न्युन्य काय,
स्वये भक्त प्रारब्ध घडवी ही माय।
आज्ञेवीना काळ ही ना नेई त्याला,
परलोकी ही ना भीती तयाला
अशक्य ही शक्य करतील स्वामी ।।२।।
उगाची भितोसी भय हे पळु दे,
वसे अंतरी ही स्वामीशक्ति कळु दे ।
जगी जन्म मृत्यु असे खेळ ज्यांचा,
नको घाबरू तू असे बाळ त्यांचा
अशक्य ही शक्य करतील स्वामी ।।३।।
खरा होई जागा श्रद्धेसहित,
कसा होसी त्याविण तू स्वामिभक्त ।
आठव ! कितीदा दिली त्यांनीच साथ,
नको डगमगु स्वामी देतील हात
अशक्य ही शक्य करतील स्वामी ।। ४।।
विभूति, नमन, नाम, ध्यानादी तीर्थ,
स्वामीच या पंचामृतात ।
हे तीर्थ घेई आठवी रे प्रचिती,
ना सोडती तया, जया स्वामी घेती हाती ।
अशक्य ही शक्य करतील स्वामी ।।५।।
Tarak mantra pdf
तारक मंत्र का सरल अर्थ
- पहला पद: हे मन, डर और शंका छोड़ दे। स्वामी की बड़ी शक्ति हमेशा तेरे साथ है।
- दूसरा पद: जहाँ स्वामी के चरण हैं, वहाँ किसी चीज़ की कमी नहीं होती। स्वामी की आज्ञा के बिना काल भी भक्त को नहीं ले जा सकता।
- तीसरा पद: बेकार में डरना छोड़ दे। स्वामी की शक्ति तेरे अंदर ही है। तू उनका बालक है, फिर डर कैसा?
- चौथा पद: पूरी श्रद्धा के साथ जाग। याद कर कि स्वामी ने कितनी बार तेरा साथ दिया है। घबरा मत, वे तेरा हाथ थामेंगे।
- पाँचवाँ पद: विभूति, नमन, नाम-स्मरण और ध्यान, ये स्वामी के पंचामृत जैसे तीर्थ हैं। जिनका हाथ स्वामी थाम लेते हैं, उन्हें कभी नहीं छोड़ते।
स्वामी समर्थ तारक मंत्र के फायदे
भक्तों की मान्यता के अनुसार इसके पाठ से:
- डर और चिंता कम होती है
- मन शांत रहता है
- मुश्किल समय में हिम्मत मिलती है
- श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है
- “स्वामी मेरे साथ हैं” यह भरोसा मजबूत होता है
(ये फायदे श्रद्धा और मान्यता पर आधारित हैं, कोई वैज्ञानिक दावा नहीं है।)
तारक मंत्र का पाठ कैसे करें?
- सुबह नहाने के बाद या शाम को शांत जगह पर बैठें।
- स्वामी समर्थ की तस्वीर के सामने दीया और अगरबत्ती जलाएँ।
- मन शांत करके श्रद्धा से मंत्र पढ़ें।
- अंत में “श्री स्वामी समर्थ जय जय स्वामी समर्थ” बोलें।
- गुरुवार का दिन स्वामी की भक्ति के लिए खास माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1: तारक मंत्र किसे समर्पित है?
श्री स्वामी समर्थ महाराज को, जो अक्कलकोट के संत और दत्तात्रेय के अवतार माने जाते हैं।
2: “अशक्य ही शक्य करतील स्वामी” का क्या मतलब है?
असंभव को भी स्वामी संभव कर देंगे।
3: क्या महिलाएँ भी तारक मंत्र पढ़ सकती हैं?
हाँ, कोई भी भक्त श्रद्धा से इसका पाठ कर सकता है।
4: क्या रोज़ पाठ करना ज़रूरी है?
ज़रूरी नहीं, लेकिन रोज़ पाठ करने से मन में स्थिरता बनी रहती है।
निष्कर्ष
श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र भक्त को याद दिलाता है कि वह अकेला नहीं है। श्रद्धा से नियमित पाठ करने पर मन में निर्भयता और विश्वास आता है। आपको यह मंत्र कैसे लगा हमे जरूर बताए।


















