लिरिक्स आरती संग्रह चालीसा त्योहार पंचांग-चौघड़िया मंत्र-स्त्रोतं व्रत कथा वेब स्टोरीज नाम जप काउंटर

Devuthani ekadashi vrat katha likhi hui: कब है देवउठनी एकादशी? जानें पूजा विधि, पारण का समय और धार्मिक महत्व

hindisanatan
Published On: अक्टूबर 30, 2025
devuthani ekadashi vrat katha
Google News
Follow Us

devuthani ekadashi vrat katha: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में 4 महीना के शयन के बाद जागते हैं आशा शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्री हरि विष्णु सभी देवी देवताओं के साथ क्षीरसागर में 4 महीना के शयन के लिए चले जाते हैं जिसे आम भाषा में तारा डूबना भी कहा जाता है इन चार महीना के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।

देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु के साथ ही मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है एकादशी को तुलसी विवाह के नाम से भी जाना जाता है है इस दिन से शादियों का शुभ आरंभ हो जाता है सबसे पहले तुलसी माता की पूजा होती है और फिर धूमधाम से तुलसी विवाह का आयोजन होता है तुलसी जी का विवाह शालिग्राम के साथ किया जाता है शालिग्राम भगवान विष्णु का ही प्रतिरूप है।

devuthani ekadashi date end parana time

पंचाग के अनुसार, देवउठनी एकादशी 2025 (Prabodhini Ekadash 2025 ) शनिवार 1 नवंबर 2025 को सुबह 9 बजकर 11 मिनट्स से प्रारंभ होगी और 2 नवंबर को सुबह 7 बजकर 31 मिनट्स पर समाप्त होगी। पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी का व्रत 2 नवंबर को किया जाएगा। आइए जानते है पारण (व्रत तोड़ने का) का समय।

2 नवंबर पारण का समय – दोपहर को 1 बजकर 11 मिनट से लेकर 3 बजकर 23 मिनट तक
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त का समय – 12:55 पी.एम.
3 नवंबर पारण का समय – सुबह 6 बजकर 49 मिनट से लेकर 9 बजकर 3 मिनट तक

Tulsi vivah significance

तुलसी शालिग्राम विवाह ये अपने आप में बहुत सुंदर शुभ संयोग है। जिन लोगों के घरों में विवाह में विलंब होता है। जिन कन्या या जिन लड़कों का विवाह बहुत विलंब से होता है। उनको आज के दिन तुलसी शालिग्राम विवाह में सम्मिलित होना चाहिए। अगर खुद भी करा सकते हो तो विवाह कराना चाहिए। आज ही के दिन शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। चार महीने नहीं हो रहे थे तो वो आज के दिन से प्रारंभ हो जाएंगे। पितृदोष से पीड़ित लोगों को अपने पितरों के लिए यह व्रत जरूर करना चाहिए इस दिन विधि विधान से पूजा करना बड़ा ही लाभदायक साबित होता है और जीवन के अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Dev uthani ekadashi vrat katha likhi hui

एक समय की बात है एक नगर में एक राजा था उसके राज्य में प्रजा बहुत सुखी थी एकादशी के दिन उसके राज्य में कोई भी अन ग्रहण नहीं करता था और ना ही अन को कोई बेचता था सभी लोग फल खाते थे एक बार भगवान श्री हरि ने राजा की परीक्षा लेनी चाहि तब भगवान श्री हरि एक सुंदर स्त्री का रूप धारण करके सड़क पर बैठ गए।

जब राजा वहां से गुजरा तो उसने उसे स्त्री को देखा उसकी सुंदरता को देखकर राजा चकित रह गया राजा ने उससे पूछा ही सुंदरी तुम कौन हो और इस तरह यहां बीच रास्ते में क्यों बैठी हो तब भगवान बोले मेरा इस दुनिया में कोई जानने वाला नहीं है मैं किससे सहायता मांगू राजा पहले ही उसके रूप पर मोहित हो चुका था तो उसने उसे सुंदरी से कहा तुम मेरे साथ मेरे महल में चलो और मेरी रानी बनकर रहो यह सुनकर वह सुंदरी बोली।

मैं तुम्हारी बात मान लूंगी पर तुम्हें इस राज्य का अधिकार मुझे सौंपना होगा राज्य पर मेरा भी पूर्ण अधिकार होगा मैं जो भी बनाऊंगी तुम्हें खाना होगा राजा उसकी रूप पर मोहित था इसलिए उसने उसे सुंदरी की सभी शर्तें स्वीकार कर ली और उसे सुंदरी को अपने महल में ले गया और उससे विवाह कर उसे रानी बना लिया।

अगले ही दिन देव उठानी एकादशी थी उसे सुंदरी ने सभी को आदेश दिया की बाजरो में बाकी दिनों की तरह अन बेचा जाए उसने महल में मांसाहारी भोजन बनवाया और राजा को परोस कर राजा को खाने के लिए कहा यह देख कर राजा बोला रानी आज देव उठनी एकादशी है मैं तो केवल फलाहार खाऊंगा तब उसे सुंदरी ने अपनी शर्त राजा को याद दिलाई और कहा यह खाना आपको खाना होगा नहीं तो मैं बड़े राजकुमार का सर कटवा दूंगी।

यह सुनकर राजा बहुत दुखी हुआ और अपने साथ खड़ी बड़ी रानी बोली महाराज धर्म ना छोड़े बड़े राजकुमार की बली दे दें बेटा तो फिर मिल जाएगा लेकिन धर्म नहीं मिलेगा ऐसा कहकर बड़ी रानी रोने लगी तभी बड़ा राजकुमार वहां आगया मां की आंखों में आंसू देख कर राजकुमार ने अपनी मां से रोने का कारण पूछा तब बड़ी रानी ने राजकुमार को सारी बात बता दी इस पर राजकुमार बोला मैं सर कटवाने के लिए तैयार हूं पिताजी धर्म की रक्षा जरूर होगी राजा दुखी मन से राजकुमार का सर कटवाने के लिए तैयार हो गया।

तब उसे सुंदर स्त्री के रूप में भगवान विष्णु ने प्रकट होकर असली बात बताई और कहा हे राजन तुम इस कठिन परीक्षा में उत्तीर्ण हुए, भगवान ने प्रसन्न मन से राजा को वर मांगने के लिए कहा तब राजा बोला प्रभु हमारे पास आपका दिया हुआ सब कुछ है आप हम पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें और हमारा उद्धार करें उसी समय वहां एक विमान उतरा राजा ने बड़े राजकुमार को राज्य सौंप दिया और विमान में बैठकर परमधाम को चला गया भगवान विष्णु जैसे आपने राजा का उद्धार किया उसी प्रकार इस कथा को सुनने वाले पढ़ने वाले हुंकार भरने वाले सभी पर कृपा करना।

devuthani ekadashi vrat katha vidhi

अगर किसी व्यक्ति के कन्या नहीं है तो वह तुलसी विवाह करके जीवन में कन्यादान का सुख प्राप्त कर सकता है

  • तुलसी पूजन के लिए सुबह जल्दी उठकर नहा ले।
  • तुलसी जी को जल चढ़ाना चाहिए।
  • इसके बाद तुलसी जी को लाल ओढ़नी सिंदूर और हल्दी लगानी चाहिए।
  • इसके बाद तुलसी जी को दूध अर्पित करना चाहिए।
  • फिर घी का दीपक जलाना चाहिए और अगरबत्ती करनी चाहिए।
  • फिर तुलसी जी की आरती करनी चाहिए और आरती के बाद तुलसी जी को घर में समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करनी चाहिए।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के आधार पर प्रस्तुत की गई है। हिन्दीसनातन इस जानकारी की सत्यता या सटीकता का दावा नहीं करता है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे केवल जानकारी के रूप में लें और किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। हमारा उद्देश्य किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या गलत धारणाओं को बढ़ावा देना नहीं है।

इसे भी पढ़े :

hindisanatan

Devuthani ekadashi vrat katha likhi hui: कब है देवउठनी एकादशी? जानें पूजा विधि, पारण का समय और धार्मिक महत्व

मैं HindiSanatan.com का संस्थापक हूं। सनातन धर्म, भक्ति और आध्यात्मिकता से जुड़े लेख, आरती-चालीसा एवं व्रत कथाएं श्रद्धापूर्वक स्वयं शोध करके लिखता हूं, ताकि सही और प्रामाणिक जानकारी सभी भक्तों तक पहुंच सके। जय श्री राधे कृष्ण 🙏

For Feedback - feedback@example.com
hindisanatan

Jagdish Kumar

मैं HindiSanatan.com का संस्थापक हूं। सनातन धर्म, भक्ति और आध्यात्मिकता से जुड़े लेख, आरती-चालीसा एवं व्रत कथाएं श्रद्धापूर्वक स्वयं शोध करके लिखता हूं, ताकि सही और प्रामाणिक जानकारी सभी भक्तों तक पहुंच सके। जय श्री राधे कृष्ण 🙏

Leave a Comment